कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), क्षेत्रीय कार्यालय नोएडा द्वारा शुक्रवार को क्षेत्र के औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों के लिए ‘विश्वास योजना, 2026’ पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नियोक्ता प्रतिष्ठानों को भविष्य निधि अंशदान में हुई देरी पर लगने वाले हरजाने (Damages) के विवादों से राहत दिलाना और योजना की बारीकियों से अवगत कराना था। कार्यशाला में नोएडा क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

शीर्ष अधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यशाला का मुख्य संचालन प्रवर्तन एवं लेखा अधिकारी श्री उज्ज्वल कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित प्रतिनिधियों को योजना के प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं के बारे में विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम में उच्च अधिकारियों की उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे:
- श्री सुयश पांडेय (क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-I)
- श्री प्रवीण कुमार (नोडल अधिकारी व क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II)
- श्री कुमार राघवेंद्र (क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II)
- श्री मुकेश सारस्वत
विवादों के त्वरित समाधान के लिए ‘वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र’ (ADR)
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि नवीनीकृत ईपीएफ योजना, 2026 के अंतर्गत अधिसूचित यह ‘विश्वास योजना, 2026’ विलंबित अंशदान पर हरजाने के मामलों को निपटाने के लिए एक ‘वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र’ (Alternative Dispute Resolution – ADR) के रूप में शुरू की गई है।
मुख्य बातें:
- प्रभावी तिथि: यह योजना 29 जून 2026 से लागू हो चुकी है।
- अवधि: यह विशेष अभियान शुरू होने की तिथि से 6 महीने तक मान्य रहेगा।
- लाभ: जिन प्रतिष्ठानों का पीएफ अंशदान जमा करने में विलंब हुआ है, वे इस योजना के माध्यम से लंबित हरजाने के मामलों का निपटारा सुगमता और कम कानूनी अड़चनों के साथ कर सकते हैं।
आगामी दिनों में भी आयोजित होंगे जागरूकता सेमिनार
योजना के नोडल अधिकारी व क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II श्री प्रवीण कुमार ने बताया कि संगठन का उद्देश्य अधिक से अधिक प्रतिष्ठानों को इस योजना से जोड़ना है ताकि वे लंबे समय से चले आ रहे विवादों को समाप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के अधिक से अधिक औद्योगिक संस्थानों को इसका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ईपीएफओ द्वारा आने वाले दिनों में भी ऐसे कई जागरूकता सेमिनार आयोजित किए जाएँगे।
कार्यशाला के अंत में उपस्थित प्रतिनिधियों के प्रश्नों और आशंकाओं का अधिकारियों द्वारा समाधान भी किया गया।





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