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जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल के ‘आउटपुट हेड’ को लाइव डिबेट में याद आया पुराना संस्थान,इंडिया न्यूज का नाम लेकर की संस्थान की फजीहत

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नोएडा: मीडिया जगत में उस वक्त हलचल मच गई जब ‘जनतंत्र टीवी’ न्यूज चैनल के वरिष्ठ चेहरे और चैनल के आउटपुट हेड राजीव शर्मा एक लाइव डिबेट के दौरान अपने ही वर्तमान संस्थान का नाम भूल गए। पत्रकारिता के एथिक्स और ब्रांडिंग के लिहाज से इसे एक बड़ी ‘ब्लंडर’ (बड़ी चूक) माना जा रहा है, क्योंकि राजीव शर्मा ने लाइव कैमरा पर जनतंत्र टीवी की जगह अपने पूर्व संस्थान ‘इंडिया न्यूज’ का नाम ले लिया।

लाइव ऑन-एयर हुआ ‘ब्रांडिंग डिजास्टर’

​घटना उस समय की है जब राजीव शर्मा जनतंत्र टीवी पर एक गंभीर राजनीतिक चर्चा की कमान संभाल रहे थे। डिबेट के प्रवाह में उन्होंने दर्शकों या पैनलिस्ट को संबोधित करते हुए अनजाने में ‘इंडिया न्यूज’ कह दिया। हालांकि उन्होंने तुरंत खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक यह बड़ी गलती रिकॉर्ड हो चुकी थी।

​मिली जानकारी के अनुसार कई साल तक इंडिया न्यूज में रहने के बाद एडिटर इन चीफ जितेंद्र शर्मा की टीम में 2026 में ही वे जनतंत्र टीवी में शामिल हुए थे।

मीडिया इंडस्ट्री में निगेटिव चर्चा के मुख्य कारण:

1. वर्तमान ब्रांड की छवि को ठेस

​किसी भी चैनल का एंकर उस ब्रांड का सबसे बड़ा प्रतिनिधि होता है। जब चैनल का आउटपुट हेड ही प्रतिद्वंद्वी चैनल का नाम पुकारने लगे, तो यह वर्तमान ब्रांड की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। मीडिया विश्लेषकों के अनुसार, ऐसी चूक से चैनल की पहचान धूमिल होती है।

2. दर्शकों के बीच विश्वसनीयता का संकट

​न्यूज एंकरिंग में ‘प्रेजेंस ऑफ माइंड’ का होना अनिवार्य है। राजीव शर्मा जैसे 25 साल के अनुभवी पत्रकार का इस तरह ‘स्लिप ऑफ टंग’ का शिकार होना यह संकेत देता है कि वे अब भी अपने पुराने कार्यस्थल से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इससे दर्शकों के बीच एंकर की गंभीरता और विश्वसनीयता कम होती है।

3. ‘अनप्रोफेशनल’ व्यवहार और आलोचना

​सोशल मीडिया पर इस क्लिप के वायरल होने के बाद पत्रकारिता जगत में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि अगर एक वरिष्ठ पद पर बैठा व्यक्ति अपने संस्थान का नाम ही गलत लेता है, तो यह कार्य के प्रति उनकी एकाग्रता और प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है।

निष्कर्ष: अनुभव और पहचान का टकराव?

​राजीव शर्मा का लंबा करियर (विशेषकर इंडिया न्यूज का कार्यकाल) शायद उनकी पेशेवर पहचान के साथ इस कदर जुड़ गया है कि वे नए मंच पर खुद को पूरी तरह स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। मीडिया गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या यह महज एक मानवीय भूल है या फिर नए संस्थान के साथ तालमेल बिठाने में आ रही किसी बड़ी कमी का संकेत?

डिस्क्लेमर: चैनल में कार्यरत महिला पत्रकार द्वारा Media4samachar को भेजे गए मेल के अनुसार

जनतंत्र टीवी के लिए यह घटना एक ‘पीआर आपदा’ की तरह है, जिसे सोशल मीडिया के दौर में नजरअंदाज करना नामुमकिन है।

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Author: media4samachar

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