नई दिल्ली / मुंबई:
भारत के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने कारोबारी घरानों में से एक, एस्सेल ग्रुप (Essel Group) ने व्यावसायिक जगत में अपने गौरवशाली 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। लगभग एक सदी लंबे इस ऐतिहासिक सफर के पूरे होने के मौके पर समूह के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने करीब 10 हजार कर्मचारियों और सहयोगियों को संबोधित किया।
Wion की रिपोर्ट के अनुसार, अपने भावुक और प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. चंद्रा ने कंपनी की स्थापना से लेकर अब तक के संघर्ष, बदलाव, नवाचार (Innovation) और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एस्सेल ग्रुप की कहानी केवल व्यावसायिक मुनाफे और आंकड़ों की नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों के संघर्ष, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए एक मजबूत संस्थान खड़ा करने की गाथा है।
1926 में हरियाणा से हुई थी शुरुआत: ‘मैसर्स रामगोपाल इंद्रप्रसाद’ का सफर
डॉ. सुभाष चंद्रा ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि इस विशाल साम्राज्य की नींव आज से ठीक एक सदी पहले, वर्ष 1926 में रखी गई थी। हरियाणा के आदमपुर में जगन्नाथ गोयनका ने ‘मैसर्स रामगोपाल इंद्रप्रसाद’ के नाम से एक छोटी सी फर्म शुरू की थी। शुरुआती दौर में यह कारोबार पूरी तरह से खाद्यान्न और कमोडिटी व्यापार (Food grain and Commodity trade) तक सीमित था।
समय के साथ, बदलती आर्थिक परिस्थितियों को भांपते हुए इस पारिवारिक व्यवसाय ने नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाना शुरू किया, जो आगे चलकर भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
सोवियत संघ (USSR) को निर्यात और 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा
समूह के विकास में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बड़ी भूमिका रही। डॉ. चंद्रा ने याद किया कि शुरुआती वर्षों में पूर्व सोवियत संघ (USSR) को बड़े पैमाने पर खाद्यान्न निर्यात करने से समूह को वह वित्तीय मजबूती मिली, जिसने भविष्य के बड़े विस्तारों का रास्ता साफ किया। इसके बाद, वर्ष 1981 समूह के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब कंपनी का सालाना टर्नओवर पहली बार 100 करोड़ रुपये के पार पहुंचा था।
ज़ी (Zee) नेटवर्क से पहले भी थी देश में मजबूत पहचान
आमतौर पर आम जनता एस्सेल ग्रुप को ‘ज़ी एंटरटेनमेंट’ और ‘ज़ी न्यूज़’ जैसे दिग्गज मीडिया ब्रैंड्स के जनक के रूप में जानती है, लेकिन डॉ. चंद्रा ने बताया कि मीडिया जगत में क्रांति लाने से पहले ही एस्सेल ग्रुप देश के बुनियादी ढांचे में अपनी पहचान बना चुका था। समूह ने कई विविध क्षेत्रों में नवाचार किया:
- फूड ग्रेन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में अनाज को सुरक्षित रखने के आधुनिक तौर-तरीके विकसित किए।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: टेलीकॉम पोल और लैमिनेटेड ट्यूब्स के निर्माण में बड़ी सफलता हासिल की।
- मनोरंजन जगत (Amusement Park): भारत के पहले और सबसे बड़े थीम पार्क ‘EsselWorld’ की स्थापना कर देश को आधुनिक मनोरंजन का नया अनुभव दिया।
”हम देश के शुरुआती स्टार्टअप्स में से एक थे”
आज के दौर में चल रहे स्टार्टअप कल्चर का जिक्र करते हुए डॉ. सुभाष चंद्रा ने एस्सेल ग्रुप को ‘स्टार्टअप संस्कृति का शुरुआती उदाहरण’ बताया। उन्होंने समूह के सभी कर्मचारियों और युवाओं से अपील की कि वे काम के दौरान लगातार नए प्रयोग करने (Experimentation) और जिम्मेदारी (Ownership) लेने की भावना को कभी कम न होने दें।
महत्वपूर्ण निर्देश: पुरानी पीढ़ी के अनुभवों का होगा दस्तावेजीकरण
डॉ. चंद्रा ने कॉर्पोरेट जगत के लिए एक अनूठी सीख देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो कर्मचारी लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं, उनके अनुभवों और सीखों को दस्तावेज (Document) के रूप में सुरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह ‘संस्थागत ज्ञान’ (Institutional Knowledge) नई पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह काम करेगा, जिससे वे संगठन की सफलताओं और चुनौतियों से सीख सकेंगे।
व्यक्तिगत संपत्ति नहीं, ‘मूल्य निर्माण’ और ‘भरोसा’ ही असली उद्देश्य
बिजनेस फिलॉसफी पर बात करते हुए डॉ. चंद्रा ने एक बहुत ही गंभीर बात कही। उन्होंने साझा किया कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी भी व्यक्तिगत संपत्ति बनाने को अपना लक्ष्य नहीं माना। उनका मानना है कि किसी भी संस्थान की असली ताकत केवल उसके बिजनेस साइज या टर्नओवर में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वह लोगों के लिए कितने रोजगार और अवसर पैदा करता है।
उन्होंने कहा, “वही संस्थान लंबे समय तक टिकते हैं और इतिहास रचते हैं, जिनकी नींव भरोसे, मजबूती और लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच पर टिकी होती है।”
भविष्य के लिए गुरुमंत्र: “निश्चितता ही सबसे बड़ा शब्द है”
संबोधन के अंत में, चेयरमैन ने एस्सेल ग्रुप के परिवार को भविष्य की चुनौतियों से न घबराने और निरंतर आगे बढ़ने का हौसला दिया। कर्मचारियों में नया जोश भरते हुए उन्होंने कहा:
“आपकी नियति हमेशा आगे बढ़ते रहना है। पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहिए, क्योंकि निश्चितता ही सबसे बड़ा शब्द है।”
एस्सेल ग्रुप का यह 100 साल का सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक छोटे से कस्बे से शुरू हुआ व्यापार, अपनी दूरदर्शिता, कड़े फैसलों और अटूट भरोसे के दम पर एक वैश्विक साम्राज्य का रूप ले सकता है।



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