मीडिया इंडस्ट्री में एंकर और चैनल प्रबंधन के बीच के विवाद अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन न्यूज़ चैनल ‘हिन्दी ख़बर’ और उसकी पूर्व एंकर रितु भंडारी के बीच का गतिरोध अब पूरी तरह से एक कानूनी जंग में तब्दील हो चुका है। ‘हिन्दी ख़बर’ की लीगल टीम ने Media4samachar को जानकारी देते हुए इस मामले में बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए पूर्व एंकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लीगल टीम ने रितु भंडारी पर ‘कॉन्ट्रैक्ट ब्रीच’ (अनुबंध का उल्लंघन), बिना सूचना के ब्रॉडकास्ट बाधित करने, संस्थान को वित्तीय व व्यावसायिक चोट पहुंचाने और बाद में सोशल मीडिया पर प्रायोजित टूलकिट के जरिए चैनल की छवि को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
चैनल की लीगल विंग ने इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजी सबूत, डिजिटल प्रिंट्स और सोशल मीडिया ट्रेल को इकट्ठा कर नोएडा पुलिस के आला अधिकारियों को सौंप दिया है, जिसके बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
’अपॉइंटमेंट लेटर’ विवाद: लीगल टीम ने जारी किए हस्ताक्षरित दस्तावेज़ों के कोलाज
इस पूरे विवाद की जड़ में एंकर द्वारा चैनल पर अपॉइंटमेंट लेटर न दिए जाने और नियमों को छुपाने के आरोप थे। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ‘हिन्दी ख़बर’ की लीगल टीम ने रितु भंडारी के ही हस्ताक्षरित (Signed) दस्तावेज़ों का एक पूरा कोलाज साक्ष्य के रूप में सार्वजनिक कर दिया है।
लीगल विंग के अनुसार, कंपनी के पास एंकर से जुड़े सभी कानूनी कागजात सुरक्षित हैं, जिनमें से मुख्य दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया गया है:
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- ऑफिशियल अपॉइंटमेंट लेटर (Appointment Letter): जिस पर एंकर के बकायदा हस्ताक्षर हैं, जो साबित करता है कि वे चैनल की आधिकारिक कर्मचारी थीं।
- वार्षिक वेतन वृद्धि पत्र (Annual Increment Letter): जो यह दर्शाता है कि संस्थान में उनकी सेवाएं नियमित थीं और नियमानुसार उनकी सैलरी बढ़ाई गई थी।
- कोड ऑफ कंडक्ट फॉर्म (Code of Conduct): संस्थान की आचार संहिता और नीतियों को मानने का सहमति पत्र।
- EPFO फॉर्म: कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े सरकारी दस्तावेज़, जिन पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।
बिंदु संख्या 14: 2 महीने का नोटिस पीरियड अनिवार्य
लीगल टीम ने सेवा नियमावली और अनुबंध की शर्तों (Terms of Contract) के दस्तावेज़ को भी सामने रखा है। इस अनुबंध के बिंदु संख्या 14 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यदि कोई कर्मचारी संस्थान से इस्तीफा देता है, तो उसे 2 महीने का नोटिस पीरियड (Notice Period) सर्व करना अनिवार्य होगा। यदि कर्मचारी ऐसा नहीं करता है, तो उसे उक्त अवधि (2 महीने) का पूरा वेतन कंपनी को हर्जाने के रूप में वापस करना होगा। लीगल टीम का दावा है कि रितु भंडारी इस क्लॉज़ से भली-भांति वाकिफ थीं।
सोची-समझी साज़िश के तहत ऑन-एयर ब्रॉडकास्ट रोकने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला केवल एक सामान्य इस्तीफे का नहीं है, बल्कि इसके पीछे ‘हिन्दी ख़बर’ को लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान बड़ा झटका देने की साज़िश का आरोप है। लीगल टीम और एचआर (HR) विभाग द्वारा तैयार की गई टाइमलाइन के अनुसार घटनाक्रम कुछ इस प्रकार रहा:
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- 30 मई 2026: एंकर रितु भंडारी ने संस्थान से मई महीने की अपनी पूरी सैलरी ली।
- 30 मई की रात: सैलरी अकाउंट में क्रेडिट होते ही उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना या औपचारिक इस्तीफे के, रात के वक्त संस्थान के सभी ऑफिशियल वॉट्सऐप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) ग्रुप्स को एक-एक करके ‘लेफ्ट’ (छोड़) कर दिया।
- 31 मई की सुबह (एंकर रोस्टर का उल्लंघन): 31 मई की सुबह के लाइव बुलेटिनों के लिए रितु भंडारी का नाम ‘एंकर रोस्टर’ में पहले से तय था। आरोप है कि उन्होंने सुबह की शिफ्ट पर आने से ठीक पहले अपना फोन बंद कर लिया या कॉल्स उठाने बंद कर दिए।
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चैनल प्रबंधन का कहना है कि सुबह के लाइव बुलेटिन को ऐन वक्त पर बाधित करना एक गंभीर कृत्य है, जिससे चैनल को व्यापक व्यावसायिक और तकनीकी नुकसान हो सकता था। एचआर मैनेजर, साथी एंकरों और आउटपुट प्रोड्यूसरों द्वारा लगातार किए गए फोन कॉल्स को रितु भंडारी ने नजरअंदाज किया और अगले ही दिन, यानी 1 जून 2026 को नोएडा में ही भारत अपडेट चैनल में अपनी नई नौकरी जॉइन कर ली।
सोशल मीडिया पर ‘टूलकिट’ और ‘महिला विक्टिम कार्ड’ का इस्तेमाल
चैनल से अचानक संपर्क टूटने और एंकर द्वारा किए गए इस कथित धोखे के बाद, ‘हिन्दी ख़बर’ ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर मीडिया इंडस्ट्री, अन्य न्यूज़ चैनलों और सरोकारों को इस अनैतिक कार्यशैली के बारे में इत्तला दी।
लीगल टीम का आरोप है कि अपनी इस शरारतपूर्ण और गैर-पेशेवर हरकत के सार्वजनिक होते ही रितु भंडारी ने शातिराना और योजनाबद्ध तरीके से डिफेंसिव होने के बजाय ‘हिन्दी ख़बर’ को ही बदनाम करने की एक आक्रामक मुहिम शुरू कर दी।
लीगल विंग का आधिकारिक बयान:
“जब एंकर की धोखेबाज़ी सामने आई, तो उन्होंने खुद को बचाने के लिए ‘महिला विक्टिम कार्ड’ का सहारा लिया। इसके बाद एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ कथित एकाउंट्स और ट्रोल आर्मी के साथ मिलकर ‘हिन्दी ख़बर’ के शीर्ष मैनेजमेंट के खिलाफ भड़ास, गालियों और झूठे आरोपों की बौछार करवा दी गई, ताकि संस्थान पर दबाव बनाया जा सके।”
कानूनी कार्रवाई: नोएडा पुलिस के पास पहुंचे स्क्रीनशॉट्स और डिजिटल सबूत
’हिन्दी ख़बर’ की लीगल टीम ने साफ कर दिया है कि वे इस तरह के डिजिटल हैरसमेंट और कॉर्पोरेट फ्रॉड के सामने झुकने वाले नहीं हैं। लीगल टीम ने सोशल मीडिया (ट्विटर/एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर चैनल के खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार के सभी स्क्रीनशॉट्स, ट्वीट लिंक्स और यूआरएल (URLs) को डिजिटल साक्ष्य (Cyber Evidence) के रूप में सुरक्षित कर लिया है।
यह तमाम डेटा नोएडा पुलिस की साइबर सेल और संबंधित थाने को औपचारिक शिकायत के साथ सौंप दिया गया है। लीगल टीम का कहना है कि वे अनुबंध के उल्लंघन के लिए सिविल कोर्ट में मानहानि और हर्जाने का केस दायर करने के साथ-साथ, संस्थान को बदनाम करने की आपराधिक साज़िश के तहत भी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं।



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