नई दिल्ली, 8 जून, 2026
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने टेलीविजन रेटिंग विवाद के बीच ब्रॉडकास्टर्स को एक बड़ी आर्थिक राहत दी है। मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जब तक न्यूज चैनलों की टेलीविजन रेटिंग्स (TRP) को निलंबित रखा गया है, तब तक उनसे ऑडियंस मेजरमेंट सर्विस के लिए किसी भी प्रकार का सब्सक्रिप्शन शुल्क (फीस) न वसूला जाए।
मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को इस ‘डार्क पीरियड’ (Dark Period) में रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए भुगतान लेना तार्किक और उचित नहीं है।
चार सप्ताह और बढ़ी TRP पर रोक
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब मंत्रालय ने न्यूज चैनलों की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक को चार सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि इसी साल मार्च में पश्चिम एशिया संघर्ष की कवरेज के दौरान कुछ चैनलों द्वारा कथित सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग के बाद सरकार ने रेटिंग्स पर रोक लगा दी थी। सरकार का तर्क था कि TRP की अंधी दौड़ गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता को बढ़ावा देती है।
BARC की स्वायत्तता पर उठे सवाल
इस सरकारी हस्तक्षेप के बाद मीडिया इंडस्ट्री में एक नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि BARC एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली स्वतंत्र संस्था है और इसके वित्तीय या सदस्यता शुल्क से जुड़े फैसले आमतौर पर आंतरिक रूप से लिए जाते हैं। ऐसे में मंत्रालय का सीधे तौर पर फीस न वसूलने का आदेश देना एक बड़ा और अभूतपूर्व घटनाक्रम माना जा रहा है। फिलहाल इस मामले पर BARC की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 और कानूनी पेच
TRP निलंबन के साथ-साथ इंडस्ट्री इस समय सरकार की नई टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 को लेकर भी असमंजस में है, जिसने 2014 के पुराने नियमों की जगह ली है। इस नई नीति का सबसे विवादास्पद हिस्सा ‘लैंडिंग पेज’ (टीवी ऑन करते ही डिफॉल्ट रूप से दिखने वाला चैनल) की व्यूअरशिप को अंतिम रेटिंग गणना से बाहर करना है।
केबल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) ने इस प्रावधान का कड़ा विरोध किया है। यह मामला फिलहाल केरल हाईकोर्ट में है, जिसने मई में इस प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
विज्ञापन बाजार में अनिश्चितता का माहौल
लंबे समय से साप्ताहिक TRP डेटा गायब होने के कारण विज्ञापनदाताओं (Advertisers) के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि विज्ञापन दरें और मीडिया प्लानिंग पूरी तरह TRP पर ही निर्भर करती हैं। वर्तमान में कई न्यूज चैनल अपने पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और ब्रांड वैल्यू के दम पर सीधे विज्ञापन सौदे कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रेटिंग्स की अनुपलब्धता अगर ज्यादा समय तक रही, तो इससे टीवी विज्ञापन बाजार की पारदर्शिता को भारी नुकसान पहुंच सकता है।



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