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​एक ‘सोया चाप’ ने वरिष्ठ पत्रकार एंकर अखिलेश आनंद को पहुँचाया अस्पताल,बिस्तर से हाथ जोड़कर की यह अपील…

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नोएडा। पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-माना चेहरा और न्यूज़ 24 के वरिष्ठ एंकर अखिलेश आनंद, पिछले चार दिनों से नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अपनी सेहत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिस पत्रकार की आवाज़ टीवी स्क्रीन पर दहाड़ती थी, आज वह अस्पताल के बिस्तर से बेहद धीमी और भावुक आवाज़ में लोगों से अपनी ज़िंदगी बचाने और बाहर के खाने से तौबा करने की अपील कर रहे हैं।
​वह एक ‘सोया चाप’ जो ज़हर बन गई

उन्होंने बताया कि नोएडा फिल्म सिटी में ‘गुप्ता चौक’ के नाम से मशहूर एक जगह पर उन्होंने सोया चाप खाई थी। उस वक्त उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह स्वाद उन्हें सीधा अस्पताल पहुँचा देगा।
​आधी रात का खौफ: गुरुवार की उस रात को अखिलेश आनंद कभी नहीं भूल पाएंगे। चाप खाने के कुछ ही देर बाद पेट में मरोड़ और असहनीय गैस बनने लगी।
​मजबूरी और दर्द: स्थिति इतनी बिगड़ी कि लगातार उल्टियां और तेज़ बुखार ने उन्हें निढाल कर दिया। आखिर में उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जहाँ वह अब भी उपचाराधीन हैं।
अस्पताल से भावुक चेतावनी: “मत खाइये बाहर का खाना”
​अस्पताल के सफेद बिस्तर और चारों तरफ लगी मशीनों के बीच से अखिलेश आनंद ने देशवासियों और अपने दर्शकों के लिए एक संदेश भेजा है। उन्होंने कहा—
​”बाहर खाने से बचिए! मैं 4 दिनों से यहाँ हूँ। हम जिसे स्वाद समझते हैं, वह मिलावट और गंदगी के कारण हमारे शरीर के लिए धीमा ज़हर बन जाता है। मिलावटी या अस्वच्छ भोजन सेहत के लिए गंभीर खतरा है, अपनी सेहत के साथ यह खिलवाड़ बंद कीजिए।”
गर्मियों में ‘फूड पॉइजनिंग’ का काल: विशेषज्ञों की चेतावनी
​अखिलेश आनंद की यह हालत केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि गर्मियों में बढ़ते फूड पॉइजनिंग के खतरे का संकेत है। तापमान बढ़ते ही बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार प्रमुख खतरे:

​तेजी से पनपते बैक्टीरिया: गर्मी के कारण खुले में रखा खाना, कटे हुए फल और बासी भोजन सबसे ज्यादा जोखिम भरे होते हैं।
​डिहाइड्रेशन का डर: इस मौसम में शरीर में पानी की कमी पहले ही रहती है, ऐसे में फूड पॉइजनिंग होने पर उल्टी-दस्त से स्थिति जानलेवा हो सकती है।
​सोया उत्पादों का जोखिम: सोया चाप जैसी चीजों को स्टोर करने के लिए सही तापमान न मिलने पर वे जहर के समान हो जाती हैं।।

​सावधानी ही एकमात्र बचाव

​विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस मौसम में केवल हल्का और ताजा घर का बना भोजन ही करें। उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं और सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बना लें। यदि उल्टी-दस्त के साथ तेज बुखार या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लें।

प्रशासन और जनता के लिए सबक

​इस घटना ने नोएडा फिल्म सिटी जैसे वीआईपी इलाके में खाद्य सुरक्षा (Food Safety) की पोल खोल दी है। क्या ‘गुप्ता चौक’ जैसी मशहूर जगहों पर बिकने वाले खाने की कभी गुणवत्ता जांच होती है?
​अखिलेश आनंद जी का यह दर्द भरा संदेश हम सबके लिए एक कड़वा सबक है। उम्मीद है कि वह जल्द स्वस्थ होकर दोबारा न्यूज़ डेस्क पर वापसी करेंगे।

सावधान रहें, सुरक्षित रहें।

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Author: media4samachar

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