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इस मीडिया संस्थान में सॉफ्टवेयर के द्वारा करोड़ो का बड़ा घोटाला,संस्थान में कार्य कर रहें अकाउंटेंट ने किया खुलासा

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मनोज चतुर्वेदी-

लखनऊ। अमृत विचार में MIS सॉफ्टवेयर में हो रहे घोटाले का काम हरिओम गुप्ता की ओर से किया जा रहा है। अमृत विचार में 25 से 30 लाख रुपए से अधिक ऐसे जमा है, जिनकी रसीदें काट तो दी गई हैं, लेकिन उन रसीदें पर बिल टैग नहीं किया गया है। उन बिल को बकाया में दिखा दिया जाता है। हरिओम गुप्ता की मिलीभगत से सॉफ्टवेयर में इस तरह की गलतियां हो रही हैं। हरिओम गुप्ता द्वारा बकाया को बोलकर बिल में गड़बड़ी कराया जाता है।

इसी वजह से एजेंसी, क्लाइंट और संवादाता को दोबारा वसूली के लिए लैटर अमृत विचार लखनऊ संस्करण द्वारा लिखवाकर भेजवाया जाता है। जबकी जिला संवादाताओं ने कितने क्लाइट्स से पैसे कैश में जमा पैसे संस्थान को पहले ही जमा कर दिए हैं। जिसकी अभी तक जिला संवादाताओं को कोई डिटेल नहीं दी गई है।

इसका घोटाला हरिओम गुप्ता और लखनऊ अकाउंटेंट एंव एचआर अरुण तिवारी द्वारा किया जा रहा है। कुछ पैसा हरिओम गुप्ता के पॉकेट में जाता हैं और कुछ किये जा रहे घोटाले में मिले लोगो को जाता है। साल 2022-23 का पैसा जो जिला संवादाताओं ने जमा कर दिया है। उसकी डिटेल 2025 में गलत बकाया दिखा के दोबारा वसूली के लिए रिमाइंडर लेटर जरी किये जा रहे हैं और संवादाताओं, ऐजेंसी आदि को वसूली की नोटिस भेजी जाती है।

एक ऐजेंसी concept communication LTD. का खुलासा मनोज चतुर्वेदी द्वारा दिए गये संलग्न के द्वारा किया गया एजेन्सी द्वारा सरकारी विज्ञापन का पैसे 2 लाख 79 हजार 8 सौ 75 रुपए जमा किया गया। रसीद तो पूरे पैसे की दी जाती है, लेकिन बिल सिर्फ 4 हजार कुछ रुपए का ही टैग किया जाता है। वहीं अमृत विचार द्वारा 2 लाख 74 हजार 340 रुपए का बकाया दिखा दिया जाता है। ऐजेंसी को एक लेटर लिखकर भेजा जाता है की बकाया पैसे जमा करें।

इसके बाद ऐजेंसी द्वारा सबूत के साथ पेमेंट ऑन एकाउंट दिखाया जाता है की पूरा पैसे समय से ही जमाकर दिया गया है। इसमें एजेंसी द्वारा पूरी बात बताई जाती है की हमने पूरा पैसा जमा कर दिया है। इस तरह से एमआईएस में हो रही 25 से 30 लाख रुपए के घोटाले की जानकारी मनोज चतुर्वेदी ने हरीओम गुप्ता को दी तो हरिओम गुप्ता ने धमकी दी अगर काम करना है तो मिलकर करो नहीं तो निकाल दिए जाओगे। इस धमकी सुनने के बाद mis में हो रही गलती की जानकारी मनोज चतुर्वेदी ने एमडी डॉ. केशव अग्रवाल और डॉ. वरूण अग्रवाल को दी।

इन अनियमितताओं की जानकारी जब अमृत विचार के एमडी डॉ. केशव अग्रवाल और डॉ. वरुण अग्रवाल को दी, तो बजाय कार्रवाई के, उन्हें बिना कारण बताए संस्थान से निकाल दिया गया।

दोनों के इस प्रकरण को संज्ञान में लेने से हरिओम गुप्ता ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए मनोज को तुरंत को बिना किसी नोटिस और कारण बताए संस्थान से निकाल दिया। यहां तक सर्कुलेशन में हो रहे घोटाले का सही ऑडिट कराया गया। इसमें हरिओम गुप्ता की मिलीभगत से 2.5 से 3 लाख हर महीने के हो रहे घोटाले का साक्ष्य मालिकों तक नहीं बताया गया। अमृत विचार लखनऊ के सर्कुलेशन में फ्री कॉपियां ज्यादा दी जाती है, जो कंपनी में सर्कुलेशन जादा दिखाया जाता है और इसकी लोगों से वसूली पेड कॉपियों से की जाती है।

इसमें भी हरिओम गुप्ता और सर्कुलेशन मैनेजर की मिलीभगत है। यहां तक की सर्कुलेशन में ऐजेंसी को अखबार 20 प्रतिशत कमीशन काटने के बाद दिया जाता है और पुन: उसी एजेंसी से मार्केट रेट पर 100 कॉपियां डेली वितरण के लिए खरीदी जाती हैं।

हो रहे घोटाले का साक्ष्य ऑडिट टीम द्वारा पकड़ा गया। हरिओम गुप्ता और सर्कुलेशन की मिली भगत से ये डिटेल्स मालिकों तक नहीं पहुंचाई जा रही हैं। ऐसी हजारों गलतियां एमआईएस में करवाई जा रही है, जो लखनऊ एडिशन में हरिओम गुप्ता की मिलीभगत से किया जा रहा है। अमृत विचार को हमेशा घाटे में दिखाया जाता है। जबकि घाटा जादा नहीं हैं जो घाटा हैं वो हरिओम के mis से किया जा रहा हैं ऐसे बहुत खुलासे मनोज जल्द ही कोर्ट में करने वाले हैं जो हरिओम और पार्थो कुनार की मिली भगत से हो रहा है। इस घोटाले का खुलासा जो भी मालिकों तक बताकर करने की

मैं मनोज चतुर्वेदी Media4samachar के माध्यम से यह भी कहना चाहता हूं की जो कंपनी में इतने बड़े घोटाले कर सकता हैं और मालिकों की आंखों में धूल झोंक सकता हैं उससे मेरी जान को खतरा भी हो सकता हैं। ऐसे में अगर मुझे कुछ भी होता हैं तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हरिओम गुप्ता, पार्थो कूनार, एचआर लखनऊ अरुन कुमार तिवारी और लखनऊ के जीएम त्रिनाथ शुक्ल जिम्मेदार होंगे। मैं सिर्फ सच्चाई के लिए लड़ाई कर रहा हूं की आम लोग जो एक-एक पैसा जमा करके अपना रोजी रोटी चला रहे हैं।

वहीं, कुछ लोग जो अपनी सुख सुविधाओं के लिए लोगों को नुकसान कर रहे हैं और लोगों की परेशान कर रहे हैं उनकी सच्चाई सबके सामने आ सके। यह भारतीय कानून के हिसाब से भी गलत हैं।

 

Disclaimer: Media4samachar को पीड़ित पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित 

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Author: media4samachar

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