एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल के भीतर चल रहा अंदरूनी घमासान अब पूरी तरह से संपादकीय कत्लेआम (Editorial Purge) में तब्दील हो चुका है। ‘इथेनॉल’ के खिलाफ वीडियो बनाने वाले बागी जूनियर एंकर्स को आनन-फानन में ‘ऑफ एयर’ (स्क्रीन से हटाने) करने के बाद भी जब प्रबंधन का गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो अब संस्थान के वरिष्ठ संपादकों (Editors) को निशाने पर ले लिया गया है।
सूत्रों से आ रही बेहद सनसनीखेज खबरों के मुताबिक, चैनल का शीर्ष प्रबंधन अब अपने ही उन संपादकों की बलि लेने की तैयारी कर चुका है, जिनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वे इन एंकर्स की इंस्टाग्राम फॉलोइंग लिस्ट में शामिल थे।
एंकर्स ऑफ करने से नहीं संभला मामला, अब संपादकीय टीम पर वार
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब कुछ तेजतर्रार जूनियर एंकर्स ने ‘इथेनॉल’ लॉबी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ’15 जुलाई’ की आशंका का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया था। इस वीडियो से बौखलाए प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से उन एंकर्स को ऑफ-एयर कर दिया और उनके शो रोक दिए।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। प्रबंधन के इस दमनकारी रवैये का अगला शिकार अब चैनल को सालों से सींचने वाले संपादक बन रहे हैं। उन पर आरोप मढ़ा गया है कि जूनियर्स के इस ‘विद्रोह’ की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इसे रोकने के बजाय इस पर मौन सहमति दी। सबूत के तौर पर उनकी इंस्टाग्राम फॉलोइंग को पेश किया जा रहा है।
‘पावर सेंटर’ ने मांगी थी मामूली टोक, चाटुकारिता में प्रबंधन ने रख लिया ‘नवरात्रि व्रत’
इस पूरे घटनाक्रम में प्रबंधन का रीढ़विहीन और डरा हुआ रवैया साफ़ उजागर हो गया है। अंदरखाने के सूत्रों का दावा है कि जिस बाहरी ‘पावर सेंटर’ के इशारे पर यह पूरी बिसात बिछाई गई है, उसने प्रबंधन से महज ‘एक दिन का उपवास’ रखने यानी एक छोटी-मोटी चेतावनी देकर मामला रफा-दफा करने को कहा था।
“मगर अपनी कुर्सी और रसूख बचाने के लिए छटपटा रहे चैनल के नीति-नियंता इस कदर घबरा गए कि उन्होंने एक दिन के उपवास की जगह सीधे ‘नवरात्रि व्रत’ का ऐलान कर दिया। यानी अब पूरे नौ दिन की कड़ाई के साथ संस्थान के भीतर बड़े संपादकों को हटाने और उनके पर कतरने का दमनकारी अभियान शुरू कर दिया गया है।”
इस्तीफों की झड़ी लगने के आसार, न्यूज़ रूम बना जेल
चैनल के भीतर इस समय अघोषित आपातकाल और भारी दहशत का माहौल है। एंकर्स को ऑफ करने के बाद अब जिस तरह से इनपुट, आउटपुट और असाइनमेंट डेस्क के वरिष्ठ संपादकों को प्रताड़ित और चिन्हित किया जा रहा है, उससे पूरे स्टाफ में भारी आक्रोश है।
संपादकीय स्वतंत्रता का गला घोंटने वाले इस ‘बचकाने सर्विलांस’ से तंग आकर कई वरिष्ठ संपादकों ने सामूहिक रूप से संस्थान छोड़ने का मन बना लिया है। सूत्रों की मानें तो अगले 24 घंटों में इस राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल से कुछ बेहद चौंकाने वाले इस्तीफे सामने आ सकते हैं, जो इस संस्थान की साख को पूरी तरह मटियामेट कर देंगे।





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