देश के मीडिया जगत में इस समय एक अभूतपूर्व और चौंकाने वाला अंदरूनी संकट गहरा गया है। एक बड़े न्यूज़ चैनल के भीतर ‘इथेनॉल’ लॉबी और प्रबंधन के बीच छिड़ी जंग अब इस कदर विकराल रूप ले चुकी है कि अंदरखाने इसकी तुलना अमेरिका के ऐतिहासिक ‘वाटरगेट स्कैंडल’ से की जा रही है। चैनल के भीतर चल रही यह अंदरूनी जांच अब सिर्फ वीडियो बनाने वाले चेहरों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी आंच ने संस्थान के कई कद्दावर और वरिष्ठ (सीनियर्स) संपादकीय सहयोगियों को भी अपनी जद में ले लिया है।
इस पूरे मामले ने डिजिटल सर्विलांस और कॉर्पोरेट वफादारी को लेकर मीडिया गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला: 15 जुलाई का खौफ़ और ‘इथेनॉल’ की आग
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ में चैनल के कुछ जूनियर एंकर्स द्वारा सोशल मीडिया पर ‘इथेनॉल’ के खिलाफ बनाए गए आक्रामक वीडियो हैं। इन वीडियोज में ’15 जुलाई’ की तारीख को लेकर कोई बड़ी आशंका या दावा किया गया था, जिसने सीधे तौर पर कुछ बड़े व्यावसायिक और राजनीतिक हितों पर चोट की।
जैसे ही यह वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए, चैनल के भीतर हड़कंप मच गया। शुरुआती दौर में इसे केवल कुछ जूनियर एंकर्स की व्यक्तिगत गतिविधि माना जा रहा था, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परतें खुलती चली गईं।
अब ‘डिजिटल लॉयल्टी टेस्ट’: इंस्टाग्राम फॉलोइंग बनी गुनाह की वजह
इस स्कैंडल का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब जांच की रडार पर संस्थान के कई सीनियर्स आ गए। इन सीनियर्स पर कोई सीधा वीडियो बनाने का आरोप नहीं है, बल्कि उन पर ‘गिल्ट बाय एसोसिएशन’ (Guilt by Association) का चाबुक चलाया जा रहा है।
जांच कमेटी के सूत्रों के मुताबिक, सीनियर्स पर गंभीर आरोप हैं कि:
- वे उन बागी जूनियर एंकर्स के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को नियमित रूप से फॉलो करते हैं।
- जूनियर एंकर्स जब 15 जुलाई की आशंका वाले वीडियो पोस्ट कर रहे थे, तब इन सीनियर्स को उसकी पूरी जानकारी थी।
- इसके बावजूद, सीनियर्स ने न तो जूनियर्स को ऐसा करने से रोका और न ही संस्थान के शीर्ष प्रबंधन (Management) को इसकी भनक लगने दी।
प्रबंधन इसे ‘मौन असहमति’ और संस्थान के खिलाफ एक अंदरूनी साजिश के रूप में देख रहा है। अब आलम यह है कि चैनल के भीतर कौन किसको फॉलो कर रहा है, किसकी रील्स लाइक कर रहा है, इस पर भी खुफिया नजर रखी जा रही है।
‘एक दिन का उपवास’ मांगा था, प्रबंधन सीधा ‘नवरात्रि व्रत’ पर चला गया!
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब एक बेहद प्रभावशाली ‘पावर सेंटर’ ने इस पूरे प्रकरण में एंट्री ली। सूत्रों का कहना है कि जिस पॉवर सेंटर ने सबसे पहले चैनल प्रबंधन का ध्यान इस गंभीर लापरवाही की ओर खींचा था, उसका मकसद सिर्फ एक चेतावनी देना था। उसने प्रबंधन से बेहद अनौपचारिक लहजे में कहा था कि वह इस मामले में ‘एक दिन का उपवास’ रखे—यानी एक प्रतीकात्मक या हल्की कार्रवाई करके मामले को रफा-दफा कर दे।
“लेकिन चैनल का प्रबंधन इस इनपुट को पाकर इस कदर संवेदनशील और पैनिक मोड में आ गया कि उसने एक दिन के ‘उपवास’ की सलाह को दरकिनार करते हुए, सीधे ‘नवरात्रि व्रत’ का रास्ता चुन लिया। यानी प्रबंधन ने अब संस्थान के भीतर एक व्यापक सफ़ाई अभियान (Purge) शुरू कर दिया है, जो अगले कई दिनों तक चलने वाला है।”
मीडिया जगत में सुगबुगाहट: कई बड़े चेहरों पर गिर सकती है गाज
इस ‘नवरात्रि व्रत’ रूपी कार्रवाई के तहत कई सीनियर्स के पर कतरे जाने और कुछ बड़े चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की पटकथा लिखी जा चुकी है। सूत्रों की मानें तो चैनल के भीतर इस समय अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है। कई कर्मचारी और अधिकारी इस डर से अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाल रहे हैं कि कहीं अनजाने में वे भी किसी ‘ब्लैकलिस्टेड’ एंकर की फॉलोइंग लिस्ट में न शामिल हों।
यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘इथेनॉल’ की यह आंतरिक आग आने वाले दिनों में और कितने बड़े संपादकीय दिग्गजों की कुर्सी झुलसाती है। लेकिन एक बात साफ है—इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि आज के दौर में आपकी सोशल मीडिया फॉलोइंग भी आपकी नौकरी और साख का फैसला कर सकती है।





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