छतरपुर (मध्य प्रदेश): देश की प्रखर और प्रतिष्ठित एबीपी न्यूज़ चैनल की वाइस प्रेजिडेंट व सीनियर एंकर चित्रा त्रिपाठी के करियर में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान और वर्षों की जन-सरोकारी पत्रकारिता के लिए ‘मानद डॉक्टरेट’ की उपाधि से नवाजा गया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर
एक साधारण विद्यार्थी से लेकर देश की सबसे प्रभावशाली एंकर्स में से एक बनने तक का सफर आसान नहीं रहा।
इस मौके पर उन्होंने बातचीत में कहा:
”यह सम्मान सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम सपनों, मेहनत और विश्वास की जीत है, जो कभी चुपचाप भीतर पलते रहे। संघर्ष, सीख और अनगिनत अनुभवों से भरी रही यह यात्रा आज एक सुखद मुकाम पर है।”
शिक्षा के प्रति पुराना लगाव और 19 साल का इंतज़ार
चित्रा त्रिपाठी के लिए यह सम्मान मात्र एक पदवी नहीं, बल्कि उनके एक पुराने सपने की पूर्णता है। गौरतलब है कि पत्रकारिता में आने से पहले भी उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड शानदार रहा है। साल 2007 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज (रक्षा अध्ययन) में MA के दौरान उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था।
डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करते समय वे भावुक नजर आईं और उन्होंने साझा किया कि एक स्वर्ण पदक विजेता छात्रा के रूप में जो सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था, वह आज पत्रकारिता के माध्यम से शिक्षा के इस उच्चतम शिखर पर पहुँचकर पूरा हुआ है।
“संघर्षों की तपिश से निखरी सफलता”
इस विशेष उपलब्धि पर अपने विचार साझा करते हुए चित्रा त्रिपाठी ने अपनी यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर इस मुकाम तक पहुँचना आसान नहीं था। उनकी यह यात्रा:
अनगिनत अनुभव: फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर स्टूडियो तक की चुनौतियां।
निरंतर सीख: हर दिन कुछ नया सीखने की ललक।
दृढ़ संकल्प: सच्चाई के साथ खड़े रहने का अटूट विश्वास।
उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “आज आँखें नम हैं, लेकिन दिल गर्व और कृतज्ञता से भरा हुआ है। यह सम्मान मुझे और भी अधिक मजबूती से अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देता रहेगा।”
पत्रकारिता जगत में हर्ष की लहर
चित्रा त्रिपाठी को ‘डॉक्टर’ की उपाधि मिलने पर मीडिया जगत और उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। जानकारों का मानना है कि यह सम्मान उन महिला पत्रकारों के लिए एक मिसाल है जो छोटे शहरों से निकलकर अपनी काबिलियत के दम पर राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।
विश्वविद्यालय के मंच से उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह आगे भी पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखेंगी और समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनती रहेंगी।यह क्षण न केवल उनके परिवार और प्रशंसकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि उनके गृह जनपद गोरखपुर और उनकी कर्मभूमि के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।
प्रमुख बिंदु:
विश्वविद्यालय: श्री कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर (M.P.) द्वारा सम्मानित।
क्षेत्र: पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान और विश्वसनीयता के लिए।
पुरानी यादें: गोरखपुर विश्वविद्यालय की गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं चित्रा।
संकल्प: उन्होंने इस सम्मान को भविष्य में और भी जिम्मेदारी और सच्चाई के साथ पत्रकारिता करने की प्रेरणा बताया।
सोशल मीडिया पर बधाईयों का तांता
जैसे ही चित्रा त्रिपाठी ने इस सम्मान की तस्वीरें साझा कीं, उनके प्रशंसकों और पत्रकारिता जगत के साथियों ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया। उनके चाहने वालों का कहना है कि यह सम्मान उनकी निष्पक्षता और जमीनी पत्रकारिता को मिली एक सही पहचान है।




Users Today : 24
Users Yesterday : 63