लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कानून को ढाल नहीं, बल्कि हथियार बनाकर निर्दोष लोगों को फंसाने और ब्लैकमेल करने वाले एक बेहद खतरनाक सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। ‘दैनिक भास्कर’ के एक स्टिंग ऑपरेशन ने यह उजागर किया है कि कैसे कुछ अपराधी तत्व महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनी धाराओं का सरेआम सौदा कर रहे हैं।
किसी भी थाने में FIR दर्ज कराने का खुला दावा
सामने आए स्टिंग वीडियो में सफलता पाठक नाम की एक महिला अंडरकवर रिपोर्टर से बेखौफ होकर बात करती नजर आ रही है। इस बातचीत के दौरान महिला ने दावा किया कि वह लखनऊ के किसी भी थाने में दुष्कर्म (धारा 376) का मुकदमा दर्ज करवा सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी महिला के अनुसार, अपराध हुआ हो या नहीं, झूठा केस बनवाना उनके लिए “नॉर्मल” बात है।
नाबालिग लड़कियों के इस्तेमाल का अंदेशा
स्टिंग के दौरान जब रिपोर्टर ने नाबालिग लड़कियों के बारे में पूछा, तो सफलता पाठक ने इसे बेहद सहजता से लेते हुए कहा, “वो आप हम पर छोड़ दीजिए।” महिला ने आगे कहा कि क्लाइंट से मुलाकात और डिटेल मिलने के बाद वह सारा काम पक्का कर देगी। यह बयान शहर में सक्रिय एक ऐसे संगठित गैंग की ओर इशारा करता है जो कम उम्र की लड़कियों को जाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग का खेल खेलता है।
पुलिसिया तंत्र और अपराधियों का गठजोड़?
राजेश साहू द्वारा साझा किए गए इस विवरण में सबसे गंभीर सवाल पुलिस की भूमिका पर खड़ा होता है। स्टिंग में महिला आत्मविश्वास के साथ कह रही है कि वह किसी भी थाने में FIR लिखवा देगी। यदि यह दावा सच है, तो यह राजधानी की पुलिसिंग पर एक गहरा दाग है। क्या पुलिस इन अपराधियों के इशारे पर काम कर रही है? या फिर इन गैंग्स ने थानों के भीतर अपना ऐसा नेटवर्क बना लिया है जहाँ बिना जांच के फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे हैं?
कानून का दुरुपयोग और बढ़ता अपराध
लखनऊ में फल-फूल रहा यह ‘धंधा’ उन महिलाओं के लिए भी बड़ी चुनौती है जो वास्तव में अपराध का शिकार होती हैं। जब सफलता पाठक जैसे लोग पैसों के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराते हैं, तो वास्तविक पीड़ितों के न्याय की लड़ाई कमजोर पड़ जाती है।
फिलहाल, इस स्टिंग के सामने आने के बाद लखनऊ पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच इस ‘ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट’ पर क्या कठोर कार्रवाई की जाती है।
बड़ी बातें:
- आरोपी: सफलता पाठक (गैंग चलाने का आरोप)।
- साजिश: किसी को भी रेप केस में फंसाकर ब्लैकमेल करना।
- अधिकार क्षेत्र: लखनऊ के किसी भी थाने में FIR कराने का दावा।
- गंभीरता: नाबालिग लड़कियों को ढाल बनाने की तैयारी।




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