नोएडा (MEDIA4SAMACHAR) नोएडा से संचालित और अपनी बदइंतजामी व विवादों के लिए प्रसिद्ध हो चुके FM न्यूज चैनल को आखिरकार झुकना ही पड़ा।
MEDIA4SAMACHAR पर पीड़ित महिला पत्रकार के हक की आवाज बुलंद होते ही चैनल प्रबंधन में खलबली मच गई। खबर प्रकाशित होने के चंद घंटों के भीतर ही, चौतरफा घिरे चैनल के डायरेक्टर राहुल भदौरिया और एचआर (HR) डिपार्टमेंट ने तत्काल प्रभाव से पीड़ित महिला प्रोड्यूसर को दफ्तर तलब किया और उनका रुका हुआ ‘फुल एंड फाइनल’ चेक सौंप दिया।
विवादों का पुराना गढ़: सैलरी डकारना इस चैनल की पुरानी फितरत
FM न्यूज चैनल में किसी पत्रकार का पैसा रोका जाना या सैलरी के लिए चक्कर लगवाना कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी वेतन को लेकर इस संस्थान में दर्जनों बार हाई-वोल्टेज ड्रामा हो चुका है। चर्चा है कि चैनल की खस्ताहाल माली हालत और लचर मैनेजमेंट के कारण यहाँ काम करने वाले पत्रकारों का भविष्य अधर में लटका रहता है। अपने हक की पगार मांगने पर कर्मचारियों को टरकाना यहाँ की परंपरा बन चुकी है।
आर्थिक और मानसिक टॉर्चर झेल रहे मीडियाकर्मी
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो संस्थान इस वक्त गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जिसका पूरा खामियाजा वहां ग्राउंड पर काम करने वाले मीडियाकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर सैलरी न देना और मैनेजमेंट की तानाशाही के चलते पत्रकारों का न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वे गंभीर मानसिक शोषण के भी शिकार हो रहे हैं।
MEDIA4SAMACHAR की इस प्रभावी और बेबाक खबर के बाद जहां पीड़ित महिला पत्रकार को न्याय मिला है, वहीं चैनल प्रबंधन की कार्यशैली एक बार फिर पूरे मीडिया जगत में सरेआम बेनकाब हो गई है।
विवादों के केंद्र में रहने वाले नोएडा के FM न्यूज चैनल ने MEDIA4SAMACHAR पर खबर चलने के बाद आनन-फानन में पीड़ित महिला प्रोड्यूसर को ‘फुल एंड फाइनल’ का चेक तो थमा दिया है, लेकिन इस पूरे मामले में सस्पेंस और ड्रामा अभी खत्म नहीं हुआ है। खबर का असर होने के बाद डायरेक्टर राहुल भदौरिया और एचआर (HR) विभाग ने पत्रकार को बुलाकर चेक तो सौंप दिया, लेकिन अब असली परीक्षा बैंक काउंटर पर होनी बाकी है।
चेक हाथ में, पर भुगतान पर संशय!
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला पत्रकार को HR डिपार्टमेंट से चेक प्राप्त हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी इसे अपने बैंक खाते में क्लियरेंस के लिए नहीं लगाया है। अब मीडिया गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या चेक मिलने के बाद महिला पत्रकार का रुका हुआ पैसा वाकई उनके बैंक खाते में क्रेडिट होगा, या फिर चौतरफा बदनामी से बचने के लिए प्रबंधन ने सिर्फ एक ‘ब्लैंक चेक’ (या बाउंस होने वाला चेक) पकड़ा कर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की है?
खस्ताहाल वित्तीय स्थिति से गहराया शक
चैनल के भीतर से आ रही खबरों की मानें तो संस्थान की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। वेतन रोकने और कर्मचारियों का आर्थिक-मानसिक शोषण करने के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इस बात की आशंका प्रबल है कि क्या खाते में चेक क्लियर होने लायक पर्याप्त फंड मौजूद भी है या नहीं। पूर्व में भी इस चैनल में सैलरी को लेकर कई बड़े विवाद हो चुके हैं, जिसके कारण कर्मचारियों का भरोसा मैनेजमेंट पर से पूरी तरह उठ चुका है।





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