प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और थानों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। थानों में लगे CCTV कैमरों के निष्क्रिय होने और पावर बैकअप की व्यवस्था ठीक न होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने पुलिस थानों को «अत्यंत संवेदनशील स्थान» करार देते हुए कहा कि ऐसी जगह पर बुनियादी सुविधाओं का ठप रहना गंभीर लापरवाही है।
इस मामले में अदालत ने SP देवरिया और भलुअनी थाने के SHO को 11 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश सुनाया है। इसके साथ ही, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को राज्य के सभी थानों में निर्बाध बिजली आपूर्ति और CCTV व्यवस्था दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला देवरिया जिले के भलुअनी थाने से जुड़ा हुआ है। एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने थाने की CCTV फुटेज तलब की थी। हालांकि, पुलिस प्रशासन अदालत के समक्ष फुटेज पेश करने में असमर्थ रहा। इसके पीछे पुलिस की ओर से तर्क दिया गया कि बिजली न होने के कारण CCTV काम नहीं कर रहे थे।
जब अदालत ने मामले की गहराई से पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया:
- भलुअनी थाने के जनरेटर और सोलर पैनल दिसंबर 2024 से ही खराब पड़े थे।
- महीनों बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इनकी मरम्मत कराने की कोई जहमत नहीं उठाई।
«कागजी कार्रवाई से नहीं चलेगा काम» – हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने पुलिस अधिकारियों की इस हीलाहवाली पर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा:
“पुलिस थाने संवेदनशील स्थान हैं। यहाँ CCTV और बिजली जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का महीनों तक ठप रहना महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि अधिकारियों की सीधी लापरवाही को दर्शाता है। अब सिर्फ कागजी कार्रवाई और औपचारिक जवाबों से काम नहीं चलेगा, धरातल पर पारदर्शी व्यवस्था दिखनी चाहिए।”
DGP को निर्देश और न्याय प्रक्रिया में सुधार की उम्मीद
अदालत ने माना कि थानों में CCTV कैमरों का निर्बाध चलना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी न्याय प्रणाली की रीढ़ है। पावर बैकअप न होने की वजह से CCTV बंद होना न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।
अदालत के प्रमुख आदेश:
- DGP को निर्देश: उत्तर प्रदेश के सभी थानों में CCTV और निर्बाध बिजली/पावर बैकअप (जनरेटर, इनवर्टर, सोलर सिस्टम) की समीक्षा की जाए और जहाँ भी कमियाँ हों, उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए।
- जवाबदेही तय: 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई में देवरिया के SP और संबंधित SHO को उपस्थित होकर इस पूरी लापरवाही पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।





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