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सहारा ग्रुप में मीडिया प्रबंधन का फिर से नया ड्रामा स्टार्ट,ब्लैंक पेपर पर कराए जा रहे हस्ताक्षर,चैनल के कर्मचारी व संपादक परेशान

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सहारा इंडिया मास कम्युनिकेशन के नए पैंतरेबाजी से राष्ट्रीय सहारा अखबार और सहारा समय चैनल के कर्मचारी अधिकारी सभी परेशान हैं। सहारा के मीडिया कर्मियों का कहना है कि मैनेजमेंट आए दिन कोई ना कोई उल्टे सीधे आदेश जारी करता है और उस आदेश पर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं होते हैं। रिजल्ट पिछले कई महीनों से सहारा मीडिया कर्मियों के लिए जो भी आदेश निकले जा रहे हैं, उस पर सक्षम अधिकारी लिखकर हस्ताक्षर किया जा रहा है। इससे सहारा मीडिया कर्मियों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

इसी कड़ी में मंगलवार को अचानक सहारा प्रबंधन ने राष्ट्रीय सहारा और सहारा चैनल के सभी लोगों के नाम, पिता का नाम, एम्पलाई कोड नंबर आदि की एक सूची बनाकर सभी हस्ताक्षर कराना शुरू कर दिया। इसे लेकर राष्ट्रीय सहारा की पटना यूनिट में कुछ कर्मचारियों ने तो बिना पढ़े सीधे हस्ताक्षर कर दिया लेकिन कई कर्मचारियों ने बिना किसी कवरिंग लेटर के किसी भी सूची पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

कई मीडियाकर्मियों ने कहा कि इस सूची पर कवरिंग लेटर होना चाहिए, जिससे समझा जा सके कि हस्ताक्षर किस लिए कराया जा रहा है और उसका क्या उपयोग किया जाएगा? लेकिन देर शाम तक कोई भी सक्षम अधिकारी जवाब नहीं दे पाया। इस कारण कुछ कर्मचारियों ने हस्ताक्षर नहीं किए, जबकि कुछ ने यह कह कर कि कल पता करने के बाद जब जानकारी हो जाएगी तब हस्ताक्षर किया जाएगा।

यहां बताना उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सहारा और सहारा चैनल के बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सैलरी, अर्ध लीव, ग्रेच्युटी और 2014 से लेकर अब तक पीएफ बकाया है। सहारा मीडिया में 2013 से ही पत्रकारों के लिए मजीठिया वेतनमान लागू है। लेकिन बीते 12 सालों में मजीठिया के लागू होने के बाद एक नये पैसे की बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। जबकि सभी यूनिटों के मैनेजरों (यूनिट हेड) ने अपनी और अपने कुछ चहेतों की सेलरी बढ़वा ली। अब इस मामले को लेकर कुछ यूनिटों के मीडिया गर्मी सुप्रीम कोर्ट में न्याय मित्र के समक्ष रखने जा रहे है कि मजीठिया वेतनमान के हिसाब से उनकी सैलरी वह महंगाई भत्ता और ग्रेच्युटी, बढ़े हुए पीएफ और ब्याज के साथ दिलाई जाए।

मीडिया कर्मियों का मानना है कि प्रबंधन ऐसा नहीं कर रहा वह जानबूझकर कर्मचारियों की आधी-अधूरी सैलरी की जानकारी कोर्ट को देने जा रहा है जो सहारा मीडिया कर्मियों के लिए बहुत घातक है। क्योंकि मीडिया के लगभग सभी अधिकारियों ने अपनी ज्यादा सैलरी किसी-न किसी प्रकार से अपना अधिकांश बकाया भुगतान भी ले लिया है।

वैसे प्रबंधन ब्लैक पेपर पर हस्ताक्षर क्यों ले रहा है इसकी जानकारी किसी को नहीं है और न तो मैनेजमेंट बताने का प्रयास कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में संदेह और आक्रोश है। इसी कारण कई कर्मचारियों ने ब्लैक सूची पर मंगलवार को हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

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Author: media4samachar

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