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चली हवा तो बदला मौसम: 5 अगस्त के अंदेशे पर लगी मुहर,तन्हाई के सन्नाटे में सिमटा संपादक जी का साम्राज्य

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अभिषेक उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार)

मीडिया जगत में अक्सर कहा जाता है कि ‘कलम की ताकत’ किसी भी सत्ता से बड़ी होती है, लेकिन जब वही कलम चाटुकारिता की स्याही में डूब जाए, तो उसका अंत कैसा होता है—इसकी एक बानगी आज एक बड़े राष्ट्रीय चैनल के प्रमुख न्यूज रूम में देखने को मिली। जिस विदाई का अंदेशा बीते 5 अगस्त को ही लग गया था, आज उस पर पूरी तरह से मुहर लग गई। केक काटने की रस्म के साथ ही ‘गुलगुले’ संपादक जी का केबिन खाली करा लिया गया और उनकी औपचारिक विदाई मुकम्मल हो गई।

​पावर में शबाब, विदाई में सन्नाटा

​अपने पूरे कार्यकाल के दौरान न्यूज रूम का माहौल कैसा रहा, यह बात किसी से छिपी नहीं है। सत्ता के पक्ष में लगातार बैटिंग करने और हर छोटे-बड़े मुद्दे को सत्ताधारी चश्मे से देखने की उनकी कार्यशैली ने पूरे न्यूज रूम को चाटुकारिता के एक खास ‘नजले’ से ग्रसित कर रखा था। जो पत्रकार निष्पक्षता की बात करते थे, उन्हें दरकिनार किया जाता रहा और जो जी-हुजूरी में आगे रहे, उन्हें तवज्जो मिलती रही।

​लेकिन सत्ता का नशा उतरते ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जिस संपादक की एक हुंकार पर कभी पूरा न्यूज रूम दौड़ पड़ता था, आज उनकी विदाई के वक्त वहां अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था।

​’नीलकमल’ के उस गीत की भी नौबत न आई

​विदाई के पलों में आमतौर पर भावुकता और पुरानी यादों का दौर चलता है, लेकिन यहां माहौल पूरी तरह अलग था। संपादक जी जब अपना सामान समेटकर केबिन से बाहर निकले, तो वे बेहद अकेले नजर आए। न्यूज रूम के इस ठंडे रवैये को देखकर तो अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि सहयोगियों के भीतर इतनी भी औपचारिकता या ‘मानवता’ नहीं बची थी कि कम से कम मोबाइल पर फिल्म नीलकमल का वह मशहूर विदाई गीत ही बजा देते:

​“बाबुल की दुआएँ लेती जा, जा तुझ को सुखी संसार मिले…”

 

​मीडिया गलियारों में चर्चा तेज

​संपादक जी की यह एकाकी विदाई आज मीडिया सर्कल्स में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के पद से हटने की कहानी नहीं है, बल्कि उन तमाम पत्रकारों और संपादकों के लिए एक सबक है जो पद पर रहते हुए निष्पक्षता को ताक पर रख देते हैं। कुर्सी और पावर अस्थायी होते हैं, लेकिन न्यूज रूम में कमाया गया सम्मान ही अंत तक साथ देता है—और ‘गुलगुले’ संपादक जी की विदाई ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है।

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Author: media4samachar

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