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Zee मीडिया ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने 1,260 करोड़ रुपये में ये बड़ी डील कर दिया फाइनल

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भारतीय रियल एस्टेट और कॉरपोरेट जगत से इस साल की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। एस्सेल समूह (Essel Group) के चेयरमैन और भारत में सैटेलाइट टेलीविजन क्रांति के जनक डॉ. सुभाष चंद्रा ने देश के सबसे वीवीआईपी इलाके ‘लुटियंस दिल्ली’ में स्थित अपना आलीशान बंगला रिकॉर्ड 1,260 करोड़ रुपये में बेच दिया है।

​यह सौदा न केवल भारतीय आवासीय रियल एस्टेट इतिहास के सबसे महंगे सौदों में शामिल हो गया है, बल्कि इसने एस्सेल समूह के भविष्य और उसके वित्तीय पुनर्गठन को लेकर कॉरपोरेट गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

​11 साल में 400% का रिटर्न: रियल एस्टेट का ‘पावर प्ले’

​लुटियंस दिल्ली का यह बंगला 2.8 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। दस्तावेज़ी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, सुभाष चंद्रा ने इस प्रीमियम प्रॉपर्टी को वर्ष 2015 में करीब 304 करोड़ रुपये में खरीदा था। महज 11 वर्षों के भीतर इस संपत्ति की कीमत में 4 गुना (400% से अधिक) का उछाल आया है।

​बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लुटियंस दिल्ली—जहां राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास, केंद्रीय मंत्रियों और देश के गिने-चुने अरबपतियों के घर हैं—वहां नई संपत्तियों की अनुपलब्धता के कारण कीमतें इस स्तर पर पहुंच चुकी हैं।

​कर्ज संकट की कड़वी यादें और चंद्रा का संकल्प

​इस महा-सौदे को समझने के लिए साल 2019 के घटनाक्रम को देखना जरूरी है। उस दौरान एस्सेल समूह देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट डेट क्राइसिस (कर्ज संकट) से जूझ रहा था। समूह की बुनियादी ढांचा (Infrastructure) कंपनियों के कारण प्रमोटरों पर हजारों करोड़ का कर्ज चढ़ गया था, जिसके लिए ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के शेयर गिरवी रखे गए थे।

​कर्जदाताओं (Lenders) के भारी दबाव के बीच सुभाष चंद्रा ने एक भावुक पत्र लिखकर देश से वादा किया था कि वे “हर एक पाई” चुकाएंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी निजी संपत्तियां ही क्यों न बेचनी पड़ें।

  • 2021 का दावा: चंद्रा ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि उन्होंने प्रमोटर स्तर के 90% से अधिक कर्ज का निपटारा कर दिया है।
  • मौजूदा स्थिति: हालांकि अधिकांश कर्ज चुकाया जा चुका है, लेकिन कुछ वित्तीय संस्थाओं के साथ अब भी कानूनी और नियामकीय (Regulatory) विवाद चल रहे हैं।

​क्या है इस मेगा डील की असली वजह?

​कॉरपोरेट विश्लेषक इस बिक्री को दो अलग-अलग नजरियों से देख रहे हैं:

​नजरिया नंबर 1: वित्तीय पुनर्गठन का अंतिम चरण

​माना जा रहा है कि ₹1,260 करोड़ की यह विशाल राशि एस्सेल समूह के बचे-कुचे वित्तीय दायित्वों और कानूनी विवादों को हमेशा के लिए दफन करने में इस्तेमाल होगी। चंद्रा अपने समूह को पूरी तरह ‘क्लीन स्लेट’ (विवाद मुक्त) करना चाहते हैं, ताकि वे नए सिरे से अपनी व्यावसायिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

​नजरिया नंबर 2: रणनीतिक मुनाफावसूली (Strategic Profit Booking)

​दूसरा वर्ग इसे विशुद्ध रूप से एक बेहतरीन कारोबारी फैसला मान रहा है। जब किसी एसेट की कीमत अपने चरम पर हो, तो उसे नकदी (Cash) में बदल लेना एक समझदारी भरा कदम है। चंद्रा ने सही समय पर इस निवेश से एग्जिट कर भारी-भरकम लिक्विडिटी (नकद पूंजी) हासिल की है।

​भ्रम से दूर: ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) की वित्तीय सेहत अलग

​इस खबर के बीच बाजार के जानकारों ने निवेशकों को सचेत किया है कि एस्सेल समूह के प्रमोटर संकट और ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) की वित्तीय स्थिति को एक चश्मे से न देखें।

  • ZEEL आज भी देश का अग्रणी और आर्थिक रूप से मजबूत मीडिया नेटवर्क है, जिसके पास बेहतरीन कैश फ्लो है।
  • ​बंगले की बिक्री प्रमोटर (सुभाष चंद्रा और उनके परिवार) की निजी और एस्सेल समूह के स्तर पर हुई है, जिसका ज़ी के दैनिक कामकाज या उसकी वित्तीय स्थिरता पर कोई नकारात्मक असर नहीं है।

​मीडिया से लेकर राजनीति तक का सफर

​हरियाणा के हिसार से एक साधारण शुरुआत करने वाले सुभाष चंद्रा का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने न केवल देश को पहला निजी टीवी चैनल (Zee TV) दिया, बल्कि राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वे हरियाणा से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। हालांकि, 2022 में राजस्थान से दोबारा राज्यसभा पहुंचने की उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी थी।

भविष्य की राह: एस्सेल समूह या सुभाष चंद्रा के कार्यालय की ओर से अभी तक इस पैसे के आधिकारिक इस्तेमाल को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इस एक सौदे ने यह साबित कर दिया है कि कॉरपोरेट की पिच पर डॉ. सुभाष चंद्रा आज भी बड़े और चौंकाने वाले फैसले लेने का माद्दा रखते हैं।

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Author: media4samachar

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