
नोएडा: मीडिया जगत में इन दिनों कार्यस्थल की गरिमा और पेशेवर नैतिकता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय समाचार चैनल ‘जनतंत्र टीवी’ (Jantantra TV) के एडिटर-इन-चीफ जितेंद्र शर्मा पर एक महिला प्रोफेशनल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार का कहना है कि जब उन्होंने कार्यस्थल की विसंगतियों और व्यवस्था की खामियों पर आवाज उठाई, तो अपनी ‘पोल खुलती’ देख एडिटर-इन-चीफ अब उनके निजी जीवन और सोशल मीडिया की पुरानी तस्वीरों को ढाल बनाकर व्यक्तिगत हमलों पर उतर आए हैं।
“निजी तस्वीरों से सच नहीं बदल सकता”
महिला पत्रकार ने जितेंद्र शर्मा को सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए कहा कि किसी कर्मचारी के निजी समय या सोशल मीडिया पोस्ट को संदर्भ से हटाकर पेश करना उनके पेशेवर दिवालियेपन को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया, “किसी कर्मचारी के निजी जीवन को आधार बनाकर उसके पेशेवर अधिकारों पर प्रश्न उठाना न तो उचित है और न ही नैतिक। कार्यस्थल के मुद्दे तथ्यों और प्रक्रियाओं से तय होते हैं, आपकी मनगढ़ंत कहानियों से नहीं।”
7 फरवरी की तस्वीरों पर दी खुली चुनौती
विवाद का केंद्र बनी 7 फरवरी की तस्वीरों पर पत्रकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जितेंद्र शर्मा इन तस्वीरों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया, “उस दिन मैं ऑफिस में मौजूद थी, अगर प्रमाण (Proof) देखना हो तो बताएं।” उन्होंने एडिटर-इन-चीफ को नसीहत दी कि तस्वीरों को ‘चयनित’ (Selective) तरीके से दिखाकर सच को नहीं छुपाया जा सकता।
तीन भाषाओं में प्रहार: ‘Nothing can be done?’
अपनी बात को वैश्विक और प्रभावी अंदाज में रखते हुए पत्रकार ने हिंदी, अंग्रेजी और स्पैनिश में संदेश दिया। उन्होंने लिखा—
“Nothing can be done? It’s hopeless to you… No se puede hacer nada… मिस्टर जितेंद्र शर्मा, यह आपकी गलतफहमी है। सत्य तथ्यों से तय होगा, न कि आपके कथनों से।”
‘मीडिया4समाचार’ और ‘भड़ास4मीडिया’ की भूमिका की सराहना
पत्रकार ने अपनी इस लड़ाई में ‘Media4Samachar’ और ‘भड़ास4मीडिया’ जैसे निष्पक्ष मंचों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनकी आवाज को मजबूती से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पोर्टल्स पर खबर प्रकाशित होने के बाद से ही एडिटर-इन-चीफ ‘तिलमिला’ गए हैं और डर के कारण अपनी मर्यादा भूल चुके हैं।
पेशेवर मर्यादा और सिस्टम की लड़ाई
यह मामला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जहाँ कर्मचारियों की बात सुने बिना निर्णय थोप दिए जाते हैं। महिला पत्रकार ने अंत में जितेंद्र शर्मा को ‘प्रोफेशनल’ बनने की सलाह देते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय चैनल के उच्च पद की मर्यादा बनाए रखें।
फिलहाल, सोशल मीडिया पर जितेंद्र शर्मा की इस कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा हो रही है और लोग इसे ‘निजता के उल्लंघन’ और ‘वर्कप्लेस हैरेसमेंट’ के नजरिए से देख रहे हैं।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
- व्यक्तिगत प्रहार का विरोध: पेशेवर विवाद में निजी तस्वीरों के इस्तेमाल को बताया अनैतिक।
- तथ्यों की मांग: कहा- सत्य दस्तावेजों से साबित होगा, मनगढ़ंत कहानियों से नहीं।
- बड़ी चेतावनी: एडिटर-इन-चीफ की ‘तिलमिलाहट’ को बताया सच की जीत।
- अधिकारों की बात: कार्यस्थल पर कर्मचारियों की आवाज दबाने वाली व्यवस्था पर किया सीधा चोट।



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