
मीडिया और टेक सेक्टर की विवादित कंपनी व न्यूज चैनल भारत अपडेट प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व हस्तांतरण (Ownership Transfer) को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। कंपनी के मूल शेयरधारक ललित सिंह बड़गुजर ने खरीदारों पर धोखाधड़ी और अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) का आरोप लगाते हुए एक सख्त कानूनी नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के बाद कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप मच गया है।
यह कानूनी नोटिस 16 जुलाई 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता योगेंद्र कुमार शर्मा के माध्यम से अमरीश जैन और विवेक पाठक को भेजा गया है।
2 करोड़ का था सौदा, शर्तों को हवा में उड़ाने का आरोप
नोटिस में किए गए दावों के मुताबिक, 25 अप्रैल 2025 को भारत अपडेट प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी (Shareholding) को ट्रांसफर करने के लिए 2 करोड़ रुपये का एक लिखित समझौता (Transfer Agreement) हुआ था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सौदा तय होने के बाद खरीदार पक्ष ने समझौते की मूल और आवश्यक शर्तों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। इसके चलते यह ट्रांसफर कानूनी रूप से कभी अंतिम रूप (Finalize) ले ही नहीं सका।
📋 लीगल नोटिस में लगाए गए 4 मुख्य आरोप:
- बिक्री राशि का गैर-भुगतान: निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी तय की गई 2 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया गया।
- कर्मचारियों के वेतन की अनदेखी: कंपनी के कर्मचारियों के बकाया वेतन और अन्य जरूरी देनदारियों (Liabilities) को नहीं चुकाया गया।
- जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा: समझौते के तहत 26 अप्रैल 2025 के बाद से कंपनी के संचालन और वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालने की जो शर्त थी, उसे पूरा नहीं किया गया।
- अनुबंध का उल्लंघन: ट्रांसफर एग्रीमेंट की कई अन्य महत्वपूर्ण और कानूनी शर्तों की सरेआम अवहेलना की गई।
”मालिकाना हक अभी भी हमारा”—मूल शेयरधारक का दावा
अधिवक्ता योगेंद्र कुमार शर्मा के माध्यम से भेजे गए नोटिस में साफ किया गया है कि चूंकि यह सौदा कानूनन पूरा नहीं हुआ और आवश्यक शर्तें अधूरी रह गईं, इसलिए भारत अपडेट प्राइवेट लिमिटेड की 100% शेयरधारिता आज भी तकनीकी और कानूनी रूप से मूल मालिकों के पास ही सुरक्षित है। कंपनी की संपत्तियों और अधिकारों पर उनका मालिकाना हक यथावत बना हुआ है।
आर-पार के मूड में मूल मालिक: 15 दिन की अंतिम मोहलत
नोटिस में अमरीश जैन और विवेक पाठक को 15 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है। इस अवधि के भीतर उन्हें:
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- सभी बकाया राशि का भुगतान करना होगा।
- कर्मचारियों के वेतन का निपटारा करना होगा।
- अनुबंध की अन्य सभी शर्तों को तुरंत लागू करना होगा।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी:
यदि तय समय सीमा (15 दिन) के भीतर इन शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो मूल मालिक खरीदारों के खिलाफ सिविल, आपराधिक (Criminal), और कंपनी कानून (Companies Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे।
निदेशकों को हटाने और कोर्ट से वसूली की तैयारी
मूल शेयरधारकों ने साफ कर दिया है कि यदि खरीदार पीछे हटते हैं या शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, तो वे कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दोनों वर्तमान निदेशकों (Directors) को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इसके अलावा, बकाया राशि, भारी ब्याज, मानसिक व व्यावसायिक हर्जाना (Damages), मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च की वसूली के लिए सक्षम न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा।
इस नोटिस के बाद अब देखना यह होगा कि अमरीश जैन और विवेक पाठक का इस पर क्या कानूनी रुख रहता है, या फिर यह मामला अदालत की लंबी चौखट पर खिंचेगा।
डिस्क्लेमर: भारत अपडेट चैनल के मुख्य शेयर होल्डर ललित सिंह द्वारा Media4samachar को भेजे गए मेल पर आधारित





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