उद्योगपति अनिल अंबानी ने मीडिया जगत के प्रमुख संस्थानों—टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI), इकोनॉमिक टाइम्स (ET) और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI)—के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में ₹2 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है। अंबानी का आरोप है कि इन मीडिया घरानों ने उनकी कंपनियों से जुड़ी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच को लेकर अत्यंत सनसनीखेज, भ्रामक और छवि धूमिल करने वाली रिपोर्टिंग की है।
कोर्ट ने जारी किया नोटिस, 24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL), टाइम्स ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक टाइम्स और समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के संपादकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी अगली सुनवाई 24 अगस्त के लिए तय की है।
’अटकलों और असत्यापित स्रोतों के आधार पर बनाया निशाना’
अनिल अंबानी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि संबंधित मीडिया संस्थानों ने जो खबरें और वीडियो प्रकाशित व प्रसारित किए, वे बिना किसी पुख्ता और सत्यापित स्रोतों के केवल अटकलों पर आधारित थे। याचिका के अनुसार, इन रिपोर्टों के जरिए अनिल अंबानी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया और कथित वित्तीय अनियमितताओं से उनका नाम जोड़ा गया, जिससे उनकी सामाजिक और व्यावसायिक साख को भारी नुकसान पहुँचा है।
’जांच कंपनियों की है, मेरी व्यक्तिगत भूमिका नहीं’
मुकदमे में कानूनी पक्ष को स्पष्ट करते हुए अनिल अंबानी की ओर से कहा गया कि:
- कंपनियों से जुड़ी जांच: सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही जांच रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications), रिलायंस होम फाइनेंस (Reliance Home Finance) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (Reliance Commercial Finance) जैसी कॉरपोरेट संस्थाओं से संबंधित है।
- रोजमर्रा के संचालन से दूरी: याचिका में यह पुरजोर दावा किया गया कि जिस विवादित अवधि की जांच की जा रही है, उस दौरान अनिल अंबानी इन कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज (Day-to-day operations) या प्रबंधन में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। इसलिए इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं बनती है।
नोटिस के बावजूद नहीं हटाई गई खबरें
याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इस भ्रामक कंटेंट को हटाने और माफी मांगने के लिए संबंधित मीडिया संस्थानों को नवंबर और दिसंबर 2025 में औपचारिक कानूनी नोटिस भेजे गए थे। इसके बावजूद, संस्थानों द्वारा न तो वह कंटेंट हटाया गया और न ही इस पर कोई खेद प्रकट किया गया, जिसके कारण उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अब सभी की निगाहें 24 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां संबंधित मीडिया संस्थान कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।





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