देश की अग्रणी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) आने वाले समय में अपने म्यूजिक और डिजिटल बिजनेस को नए पंख देने की तैयारी कर रही है। पारंपरिक टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग कारोबार में आई सुस्ती के बीच, कंपनी अब अपने हाई-ग्रोथ सेगमेंट्स, विशेषकर ‘Zee Music Company’ के विस्तार के लिए बड़े निवेश और संभावित संरचनात्मक बदलावों (Structural Changes) पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कंपनी की चौथी तिमाही (Q4) की अर्निंग्स कॉल के दौरान ZEEL के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पुनीत गोयनका ने इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं।
वैल्यू अनलॉकिंग पर नजर: डिमर्जर या स्ट्रैटेजिक पार्टनर की संभावना
अर्निंग्स कॉल के दौरान निवेशकों और विश्लेषकों को संबोधित करते हुए पुनीत गोयनका ने कहा कि ZEEL लगातार अपने म्यूजिक बिजनेस में निवेश बढ़ाना चाहती है, क्योंकि यही सेक्टर भविष्य की ग्रोथ का एक बड़ा और मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।
कारोबार की वास्तविक वैल्यू को अनलॉक करने के सवाल पर गोयनका ने संकेत दिए कि भविष्य में ‘Zee Music Company’ को मूल कंपनी से अलग कर एक स्वतंत्र इकाई (Demerger) के रूप में स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा, इस वर्टिकल में किसी बड़े रणनीतिक भागीदार (Strategic Partner) या वैश्विक निवेशक को शामिल करने जैसे विकल्पों के दरवाजे भी खुले रखे गए हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि फिलहाल कंपनी का प्राथमिक फोकस ऑर्गेनिक ग्रोथ और मौजूदा कारोबार को जमीन पर मजबूत बनाने पर है।
दिग्गजों से मुकाबला: आक्रामक निवेश ही एकमात्र रास्ता
भारतीय संगीत बाजार में प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए पुनीत गोयनका ने बेहद साफगोई से स्वीकार किया कि टी-सीरीज (T-Series) और सारेगामा (Saregama) जैसे स्थापित प्रतिस्पर्धियों की तुलना में Zee Music अभी भी अपेक्षाकृत एक छोटा प्लेयर है। यही वजह है कि कंपनी अब इसमें लगातार पूंजी निवेश (Capital Investment) करके इसे एक बड़े और आक्रामक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में वैल्यू क्रिएशन के लिए अच्छे अवसर सामने आते हैं, तो कंपनी उन पर गंभीरता से विचार करेगी।
क्यों बदला ZEEL का फोकस?
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग (Linear TV) के विज्ञापन राजस्व (Ad Revenue) की रफ्तार धीमी पड़ने के बाद अब ज़ी ग्रुप अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। कंपनी का पूरा ध्यान अब उन सेगमेंट्स पर है जहाँ भविष्य में तगड़ी ग्रोथ की उम्मीद है, जैसे:
- म्यूजिक और डिजिटल कंटेंट (Zee Music)
- ओटीटी प्लेटफॉर्म (Zee5)
- फिल्म निर्माण और डिस्ट्रीब्यूशन (Zee Studios)
- लाइव इवेंट्स और ऑन-ग्राउंड एक्टिविटीज
कंपनी प्रबंधन का मानना है कि डिजिटल कंजम्पशन के इस दौर में म्यूजिक और ओटीटी कारोबार आने वाले समय में राजस्व (Revenue) के नए और बेहद मजबूत स्रोत तैयार कर सकते हैं।
2014 से अब तक का सफर और बाजार की चुनौतियाँ
गौरतलब है कि ZEEL ने वर्ष 2014 में देश के म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखते हुए ‘Zee Music Company’ की शुरुआत की थी। पिछले एक दशक में कंपनी ने बॉलीवुड और रीजनल (क्षेत्रीय) सिनेमा के म्यूजिक राइट्स हासिल कर बाजार में अपनी एक मजबूत और खास मौजूदगी दर्ज कराई है।
हालांकि, मौजूदा समय में बाजार की राह इतनी आसान नहीं है। Zee Music को जहाँ एक तरफ घरेलू मोर्चे पर T-Series, Saregama और Tips Music जैसी भारी-भरकम बजट वाली पुरानी कंपनियों से टक्कर मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ Sony Music, Universal Music Group (UMG) और Warner Music Group जैसे अंतरराष्ट्रीय दिग्गज भी भारतीय बाजार में अपना एकाधिकार बढ़ाने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। ऐसे में कंटेंट लाइब्रेरी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) को बढ़ाने के लिए ज़ी को भारी निवेश की दरकार होगी।
क्या कहते हैं मीडिया एक्सपर्ट्स?
उद्योग जगत के विश्लेषकों का मानना है कि सोनी (Sony) के साथ विलय टूटने के बाद, ZEEL के लिए अपने एसेट्स को री-स्ट्रक्चर करना बेहद जरूरी हो गया है। यदि ज़ी अपने म्यूजिक कारोबार को एक अलग लिस्टेड इकाई के रूप में स्थापित करने या किसी बड़े वैश्विक टेक/म्यूजिक दिग्गज को बतौर रणनीतिक साझेदार जोड़ने में सफल रहती है, तो इससे न सिर्फ कंपनी पर कर्ज का दबाव कम होगा, बल्कि इसके डिजिटल और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम को एक नई वित्तीय मजबूती मिलेगी।



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