नई दिल्ली/इलाहाबाद:
देश के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया घरानों में से एक ‘दैनिक जागरण’ समूह (जागरण प्रकाशन लिमिटेड – JPL) में चल रहा पारिवारिक और कॉरपोरेट विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने जागरण प्रकाशन लिमिटेड की आज (29 मई 2026 को) प्रस्तावित एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) को आयोजित करने की अनुमति दे दी है।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने बहुसंख्यक शेयरधारकों को झटका देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि इस बैठक में पास होने वाले किसी भी प्रस्ताव को फिलहाल लागू नहीं किया जाएगा। NCLAT का यह आदेश कॉरपोरेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसने एक तरफ शेयरधारकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की है, तो दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक यथास्थिति (Status Quo) भी बनाए रखी है।
NCLAT का आदेश: क्या है कानूनी पेच?
मामले की सुनवाई करते हुए अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने बीच का रास्ता निकाला है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
- EGM पर रोक नहीं: शेयरधारकों की मांग पर बुलाई गई एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग तय शेड्यूल के अनुसार हो सकती है।
- फैसलों पर ‘होल्ड’: बैठक में जो भी प्रस्ताव या वोटिंग होगी, उसके नतीजों को तब तक ठंडे बस्ते में रखा जाएगा, जब तक कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच में लंबित मुख्य याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस आदेश का मतलब यह है कि अगर आज की बैठक में किसी को पद से हटाने या नया नियम लाने का प्रस्ताव पास भी हो जाता है, तो भी वह कानूनी रूप से प्रभावी नहीं माना जाएगा।
विवाद की जड़: गुप्ता परिवार में वर्चस्व की जंग
’दैनिक जागरण’ समूह का यह विवाद कोई साधारण कॉरपोरेट लड़ाई नहीं है, बल्कि यह इसके प्रमोटर ‘गुप्ता परिवार’ के सदस्यों के बीच चल रहे अंदरूनी मतभेदों का नतीजा है। कंपनी के मालिकाना हक और बोर्ड के नियंत्रण को लेकर परिवार के दो धड़े आमने-सामने हैं।
यह EGM मुख्य रूप से जागरण मीडिया नेटवर्क इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (JMNIPL) की मांग पर बुलाई गई थी। JMNIPL असल में जागरण प्रकाशन लिमिटेड (JPL) की मूल होल्डिंग कंपनी है, जिसके पास कंपनी की भारी-भरकम 67.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बहुसंख्यक शेयरधारक होने के नाते JMNIPL कंपनी के मौजूदा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बड़ा बदलाव चाहती है।
मुख्य एजेंडा: सात स्वतंत्र निदेशकों को हटाने की तैयारी
इस पूरी कानूनी लड़ाई के केंद्र में कंपनी के सात स्वतंत्र निदेशक (Independent Directors) हैं। होल्डिंग कंपनी (JMNIPL) का आरोप है कि:
- इन सात निदेशकों की नियुक्ति बहुसंख्यक शेयरधारकों (Majority Shareholders) की इच्छा और सहमति के खिलाफ जाकर की गई थी।
- इसके साथ ही, मैनेजमेंट के एक धड़े और महेंद्र मोहन गुप्ता के उन अधिकारों को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत इन निदेशकों की नियुक्ति में मतदान किया गया था।
JMNIPL का मानना है कि मौजूदा बोर्ड कंपनी के बड़े शेयरधारकों के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है, इसलिए इन सात निदेशकों को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए।
अब आगे क्या? NCLT इलाहाबाद पर टिकी नजरें
NCLAT के इस संतुलित रुख के बाद गेंद अब एक बार फिर NCLT की इलाहाबाद बेंच के पाले में चली गई है।
विशेषज्ञों की राय: “NCLAT ने किसी भी पक्ष को एकतरफा राहत नहीं दी है। प्रबंधन को यह तसल्ली है कि उनके निदेशक तुरंत नहीं हटाए जा रहे, वहीं प्रमोटर ग्रुप को यह राहत है कि उनकी बैठक और वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो रही है। अब इस कॉरपोरेट जंग का आखिरी फैसला इलाहाबाद NCLT की कोर्ट से ही तय होगा।”
आने वाले दिनों में इस मामले की अंतिम सुनवाई NCLT इलाहाबाद में होगी, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे। देश के इस बड़े मीडिया साम्राज्य का नियंत्रण किसके हाथ में रहेगा, यह पूरी तरह से अब अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करता है।



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