कानपुर। शहर के बहुचर्चित ‘साकेत दरबार प्रकरण’ में जिला जेल में बंद कानपुर से संचालित सेटेलाइट हिन्दी ABC न्यूज़ चैनल का मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे की मुश्किलें आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ती नजर आ रही हैं। ‘अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा’ नामक संगठन ने अब उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने जिलाधिकारी (DM) को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि अखिलेश दुबे गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं, बल्कि जेल से बाहर रहने के लिए बीमारी का “नाटक” कर रहे हैं। मुक्ति मोर्चा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच दिल्ली या ऋषिकेश के एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों के पैनल से कराने और उन्हें तत्काल वापस जेल की सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।
अस्पताल के AC कमरे से सिंडिकेट चलाने का संगीन आरोप
मुक्ति मोर्चा ने अपने शिकायती पत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि अखिलेश दुबे बीमारी की आड़ लेकर पिछले करीब डेढ़ महीने से कानपुर के उर्सला अस्पताल (Ursla Hospital) में ऐश-ओ-आराम से भर्ती हैं। आरोप है कि अस्पताल के वातानुकूलित (AC) कक्ष को उन्होंने अपना ठिकाना बना लिया है, जहां से वह लगातार अपने अवैध सिंडिकेट का संचालन कर रहे हैं। संगठन ने साफ तौर पर कहा कि इस खेल में शहर के कुछ रसूखदार डॉक्टर, राजनेता, पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, जो मिलकर कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और उन्हें जेल से बाहर रखने में मदद कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद रची गई ‘बीमारी की स्क्रिप्ट’
यह पूरा मामला उस समय और ज्यादा गरमा गया जब होटल कारोबारी रवि सतीजा से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ। आरोप है कि रवि सतीजा को कथित तौर पर एक फर्जी मुकदमे में फंसाया गया था और फिर मामला रफा-दफा करने के एवज में ढाई करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी वसूली गई थी। इस मामले में जब अखिलेश दुबे की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो गई, तो जेल जाना तय देख उनकी बीमारी को लेकर सवाल उठने लगे।
आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद, सिंडिकेट की मदद से बीते 6 अप्रैल को अखिलेश दुबे को उर्सला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। वहां शुरुआत में डॉक्टरों ने ‘हृदय रोग’ (Heart Disease) का हवाला दिया, कुछ दिन बीते तो ‘डायबिटीज’ और अब ‘घुटनों की समस्या’ की नई थ्योरी सामने लाकर उन्हें अस्पताल में ही रोक कर रखा गया है।
जेल प्रशासन के 5 पत्रों को उर्सला अस्पताल ने किया दरकिनार: जेल मैनुअल का उल्लंघन
शिकायत पत्र में सरकारी व्यवस्था और नियमों के उल्लंघन का भी कच्चा चिट्ठा खोला गया है। दावों के मुताबिक:
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- 5 बार भेजे पत्र: जिला जेल प्रशासन ने अखिलेश दुबे को वापस जेल भेजने के लिए उर्सला अस्पताल प्रबंधन को एक या दो नहीं, बल्कि पूरे पाँच बार आधिकारिक पत्र लिखे।
- अस्पताल का इनकार: हर बार उर्सला अस्पताल के डॉक्टरों ने किसी न किसी नई बीमारी या मेडिकल कंडीशन का हवाला देकर उन्हें डिस्चार्ज करने से साफ मना कर दिया।
जेल मैनुअल 2022 का उल्लंघन:
शिकायतकर्ता ने जेल मैनुअल 2022 के पैरा 1004 (8) का विशेष उल्लेख किया है। इस नियम के तहत किसी भी कैदी को उसकी आवश्यकता से अधिक समय तक जेल की परिधि से बाहर किसी बाहरी अस्पताल में नहीं रखा जा सकता। अखिलेश दुबे के मामले में इस नियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
प्रज्ञा त्रिवेदी की चेतावनी: 7 दिनों में कार्रवाई नहीं तो सीधे CM ऑफिस और हाईकोर्ट जाएगा मामला
मुक्ति मोर्चा की सक्रिय सदस्य प्रज्ञा त्रिवेदी ने उर्सला अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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- कुछ डॉक्टरों ने मिलीभगत कर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार की है, ताकि बिना जमानत के भी एक रसूखदार कैदी को जेल से बाहर ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ दिया जा सके।
- यह पहली बार नहीं है; इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी अखिलेश दुबे ने छाती में दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग भेजा गया था। हालांकि, तब जांच में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई थी और उन्हें वापस जेल भेज दिया गया था।
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प्रज्ञा त्रिवेदी ने जिला प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रशासन ने इस मामले में कोई ठोस और दंडात्मक कदम नहीं उठाया, तो मुक्ति मोर्चा इस पूरे सिंडिकेट के गठजोड़ को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा ‘अंटू’ पर भी आरोप, मंत्री ने कहा- ‘निराधार’
इस हाई-प्रोफाइल मामले में राजनीतिक गलियारों से भी एक बड़ा नाम सामने आया है। शिकायती पत्र में प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा ‘अंटू’ पर आरोप लगाया गया है कि वह अपने रसूख और पुराने राजनैतिक-प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उर्सला अस्पताल के डॉक्टरों पर दबाव बना रहे हैं और अखिलेश दुबे को बचा रहे हैं।
पूर्व मंत्री का पक्ष:
इन आरोपों के सामने आने के बाद पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा ‘अंटू’ ने तुरंत अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया। अंटू मिश्रा ने कहा:
”अखिलेश दुबे से मेरे केवल पुराने सामाजिक संबंध हैं। किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन के पोस्टरों में एक साथ नाम प्रकाशित होना एक सामान्य प्रक्रिया है, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मैं किसी कानूनी मामले या जांच में किसी की अवैध मदद कर रहा हूँ।”
अब देखना यह होगा कि मुक्ति मोर्चा के इस शिकायती पत्र और 7 दिनों के अल्टीमेटम के बाद कानपुर जिला प्रशासन और उर्सला अस्पताल प्रबंधन इस पर क्या रुख अपनाता है।



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